========== Date: 16/06/2018=========
किराये की जिंदगी
कितनी बेधड़क, बेबाक, अपनी सी है ये जिंदगी,
थोड़ी अपनी, थोड़ी पीढ़ियों की है ये जिंदगी।
सामाजिक मर्यादाओं में आजाद ये जिंदगी,
रिश्तों के तानों में बुनती सुलझती ये जिंदगी।।
निश्छल मासूम बचपन से आगाज हुई जिंदगी,
नयी धड़कन के एहसास तक निर्दोष ये जिंदगी।
दिलों के जज्बातों में जवां होती जिंदगी,
खुद में खुद के होने के विश्वास तक ये जिंदगी।।
नये अध्यायों के पन्नों में अल्फाज रचती जिंदगी,
मैं के मैं से, मैं ही मैं में उलझती जिंदगी।
संस्कृति संस्कारों में विस्मृत होती जिंदगी,
बस समय हुआ, अब नये किरायेदार की है जिंदगी।।
तस्वीरों से ही हम उनके इजहार-ए-इश्क करते रहे,
उनकी यादों से अपनी पलकें भिगोते रहे।
जनाजे में भी हमारे, वो मिलने नहीं आये हमसे,
हम कब्र में भी उनके इन्तजार में महफिले सजाते रहे।।
मैं नहीं जानता कि मैं इतना गमगीन क्यूँ हूँ,
पत्थर नहीं हूँ, फिर भी इतना मजबूर क्यूँ हूँ।
काश संभाल पाता मै अपने हालात को,
मगर जानता हूँ मैं मजबूर हूँ, फिर भी इतना भी मजबूर नहीं हूँ।।
सोचता हूँ काश अपने गुस्से का इजहार कर पाता।
इतनी नफरत करता कि कभी प्यार ना कर पाता।।
बहुत लम्बा सफर है जिन्दगी का, सिर्फ यादों से नहीं जिया जा सकता।
राह मुश्किल है मंजिल की, मगर सिर्फ इरादों से नहीं चला जा सकता।
चलो आज कर लेते हैं, जान-बूझ कर कुछ हसी गुनाह,
एक ही गुनाह का दर्द उम्र भर नहीं ढोया जा सकता।।
राह मुश्किल है मंजिल की, मगर सिर्फ इरादों से नहीं चला जा सकता।
चलो आज कर लेते हैं, जान-बूझ कर कुछ हसी गुनाह,
एक ही गुनाह का दर्द उम्र भर नहीं ढोया जा सकता।।
ज्यादा की चाह इक आस बन जाती है, दिल से मांगी गयी फरियाद गुनाह बन जाती है।
कुछ उसूल बना लिये अगर इंसान बने रहने के लिये, ये इंसानियत की राहें हैवान बन जाती हैं।
महसूस करना छोड़ दो तो अजीम-ए-मोहब्बत भी तलाक बन जाती है,
बस कर लो अब हर हद पार, वरना ये हद भी इक तलाश बन जाती है।।
कुछ उसूल बना लिये अगर इंसान बने रहने के लिये, ये इंसानियत की राहें हैवान बन जाती हैं।
महसूस करना छोड़ दो तो अजीम-ए-मोहब्बत भी तलाक बन जाती है,
बस कर लो अब हर हद पार, वरना ये हद भी इक तलाश बन जाती है।।
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journey of last few months......
हमारा अक्श अपने वजूद से मिलने वाला था,
इक लम्बे इन्तजार का सफर थमने वाला था।
हजार सपने जो इस लम्हे के इन्तजार में बैठे थे,
सब खुश थे, उन्हे पता था कि उनका भी वक्त आने वाला था।।
इक लम्बे इन्तजार का सफर थमने वाला था।
हजार सपने जो इस लम्हे के इन्तजार में बैठे थे,
सब खुश थे, उन्हे पता था कि उनका भी वक्त आने वाला था।।
इक लम्बी खामोशी अपने अन्त का इन्तजार कर रही थी,
वो गा गा कर अपने होने का ऐलान कर रही थी।
कहीं कोई कसर रह ना जाये अधूरी,
अपने मिटने के लिये वो हर श्रंगार कर रही थी।।
वो गा गा कर अपने होने का ऐलान कर रही थी।
कहीं कोई कसर रह ना जाये अधूरी,
अपने मिटने के लिये वो हर श्रंगार कर रही थी।।
ब़डी दुआवो से कोई आने वाला था,
हर गम किसी ना किसी खुशी से मिटने वाला था।
तमाम इबादतें अपने मंजर से मिलने वाली थीं,
लहू में घुला पुराना दर्द, अपने कारण से मिलने वाला था।।
हर गम किसी ना किसी खुशी से मिटने वाला था।
तमाम इबादतें अपने मंजर से मिलने वाली थीं,
लहू में घुला पुराना दर्द, अपने कारण से मिलने वाला था।।
हर तरफ बस इन्तजार की घडियाँ लगी थीं,
मुश्किल था लम्हा मगर अन्जाम की खुशी थी।
सब कुछ फड़क कर बाहर आने को बेताब था,
शायद वो प्यारा सा अजनबी किसी से मिलने को बेताब था।।
मुश्किल था लम्हा मगर अन्जाम की खुशी थी।
सब कुछ फड़क कर बाहर आने को बेताब था,
शायद वो प्यारा सा अजनबी किसी से मिलने को बेताब था।।
अभी तो ये खुशियाँ अपने चरम पर थीं,
आने वाले वक्त की हकीकत से बेपरवाह सी थी।
अभी तक के सारे सपने खुद ही संजोये थे,
किसी और के सपनों से टकराने के अंजाम से अंजान थी।।
आने वाले वक्त की हकीकत से बेपरवाह सी थी।
अभी तक के सारे सपने खुद ही संजोये थे,
किसी और के सपनों से टकराने के अंजाम से अंजान थी।।
अंजाम इंतजार का कुछ और रंग ले आया, वो सफर का अंत बहुत कुछ अपने संग लाया,
जिस लम्हे का इन्तजार था बहुत अरसे से,
वो लम्हा लम्बे इंतजार को म्रग-मरीचिका बता गया,
मेरे सफर की मंजिल अपनी मंजिल पा चुकी थी, मेरा इन्तजार अमर हो गया।।
जिस लम्हे का इन्तजार था बहुत अरसे से,
वो लम्हा लम्बे इंतजार को म्रग-मरीचिका बता गया,
मेरे सफर की मंजिल अपनी मंजिल पा चुकी थी, मेरा इन्तजार अमर हो गया।।
दबी थी आहें तभी अच्छा था,
वो सब छुपा था जो कहीं वही अच्छा था।
ये जो कश्मकश का लम्बा सफर तय किया चंद पलो में,
ये सफर तन्हा था, तो कहीं अच्छा था।।
वो सब छुपा था जो कहीं वही अच्छा था।
ये जो कश्मकश का लम्बा सफर तय किया चंद पलो में,
ये सफर तन्हा था, तो कहीं अच्छा था।।
वो झरोखे तेरे आने के इन्तजार में खुले रखे थे,
वो पल जो मेरे अरमानों से निकल कर, तेरे संग जीने को बेकरार बैठे थे।
उन सब का हिसाब तो कर चुके थे हम, उन पलों और खुले दरवाजो को बंद तो कर चुके थे,
उफ्फ ये उलझन कमबख्त इश्क की, हिसाब किताब से प्यार कर रहे थे।।
वो पल जो मेरे अरमानों से निकल कर, तेरे संग जीने को बेकरार बैठे थे।
उन सब का हिसाब तो कर चुके थे हम, उन पलों और खुले दरवाजो को बंद तो कर चुके थे,
उफ्फ ये उलझन कमबख्त इश्क की, हिसाब किताब से प्यार कर रहे थे।।
माना हमने कि इक अजीम गुनाह की ओर बढ़ रहे थे हम,
इक दर्द के कफन के लिये, इक नये दर्द का आगाज कर रहे थे हम।
फिर सोचा चलो थोड़ा और सब्र कर लें, कुछ लम्हों को और जब्त कर लें,
मगर मुहब्बत तो आने वाले दर्द को हमसे ही हो गयी,
इक दर्द के कफन के लिये, इक नये दर्द का आगाज कर रहे थे हम।
फिर सोचा चलो थोड़ा और सब्र कर लें, कुछ लम्हों को और जब्त कर लें,
मगर मुहब्बत तो आने वाले दर्द को हमसे ही हो गयी,
अभी इक दर्द का कफन मिला नहीं, नये मेहमान से हमें भी मोहब्बत हो गयी।।
कहते हैं कि ये सफर खुद ही कट जाता है,
वक्त कैसा भी हो, हर हाल में गुजर जाता है।
एहसास लम्हों के साथ होता है, गुजरते हुये और आते हुये पल के एहसास में ही ये जिन्दगी अपनी साँसे जी लेती है,
वक्त कैसा भी हो, हर हाल में गुजर जाता है।
एहसास लम्हों के साथ होता है, गुजरते हुये और आते हुये पल के एहसास में ही ये जिन्दगी अपनी साँसे जी लेती है,
कभी तन्हा तो कभी भीड़ में, ये भी अपना सफर तय कर लेती है।।
लो आज मंजिलों को छू कर आयी है ये हवा, हमारी मोहब्बत की परछाई है ये हवा।
लो मुक्तसर हो गयी ये आरजुयें हमारी, हां इन साँसो से ही तो चल रही है ये हवा।।
लो मुक्तसर हो गयी ये आरजुयें हमारी, हां इन साँसो से ही तो चल रही है ये हवा।।
फरियाद उनकी खुशी की, दर्द उनके दर्द का,
मोहब्बत उनसे की है, या सौदा किया है उनके एहसास का।
चलो छोड़ो कई सवाल और भी बाकी है,
ये जो सफर है उनसे मिलने का, कई जन्म अभी और बाकी है।।
मोहब्बत उनसे की है, या सौदा किया है उनके एहसास का।
चलो छोड़ो कई सवाल और भी बाकी है,
ये जो सफर है उनसे मिलने का, कई जन्म अभी और बाकी है।।
सोचे क्या, हम आज ये सोचते हैं,
वो हमारी सोच के पहरेदार, हम भी आयें उनकी सोच में अभी इन्तजार बाकी है।
चलो इक कोशिश करते हैं उनसे मोहब्बत जताने की,
मगर अभी उन पर हमारे अधिकार का हक बाकी है।।
वो हमारी सोच के पहरेदार, हम भी आयें उनकी सोच में अभी इन्तजार बाकी है।
चलो इक कोशिश करते हैं उनसे मोहब्बत जताने की,
मगर अभी उन पर हमारे अधिकार का हक बाकी है।।
बस इक तमन्ना थी, उनके संग अपनी जिन्दगी का सफर तय करना था,
इक आरजू थी, उनके हर लम्हे में खुशी का रंग भरना था।
मगर वो किसी और के संग अपनी जिन्दगी का सफर तय करना चाहते हैं,
चलो तमन्ना ना सही हमारी आरजू तो पूरी हो गयी, उनकी जिन्दगी रौशन तो हो गयी।
इक आरजू थी, उनके हर लम्हे में खुशी का रंग भरना था।
मगर वो किसी और के संग अपनी जिन्दगी का सफर तय करना चाहते हैं,
चलो तमन्ना ना सही हमारी आरजू तो पूरी हो गयी, उनकी जिन्दगी रौशन तो हो गयी।
इन्तजार अब किस लम्हे का कर रहे हैं हम, आरजुयें तो पूरी हो गयी अब शायद अरमानों का इन्तजार कर रहे हैं हम।।
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जिन्दगी है यही...
कल थी वो खुश तो हम भी थे वहीं कहीं, आज उनके गमों से बेजार हो गये है,
चंद लम्हे थे उनके साथ हमारे, हम उन्ही से बेकरार हो गये है।
कुछ लोग तो तमाम लम्हे साथ रहते हैं उनके, जिन्हे इसका कोई एहसास नहीं है,
हम चंद लम्हों के साथ के लिए, हर हद से गुजरने को भी तैयार हैं।।
चंद लम्हे थे उनके साथ हमारे, हम उन्ही से बेकरार हो गये है।
कुछ लोग तो तमाम लम्हे साथ रहते हैं उनके, जिन्हे इसका कोई एहसास नहीं है,
हम चंद लम्हों के साथ के लिए, हर हद से गुजरने को भी तैयार हैं।।
ना जाने कितने लोग उन्हे देखते हैं, जिन्हे उनसे ना कोई सरोकार है,
हम बस सिर्फ इक नजर के लिए, खुद को कुरबान करने को तैयार हैं।
चुने थे हमने भी कुछ पल, जिनमे वो हम पर ऐतबार कर रहे थे,
आज उन्ही लम्हों के संग सारी उम्र जीने को भी तैयार हैं।।
हम बस सिर्फ इक नजर के लिए, खुद को कुरबान करने को तैयार हैं।
चुने थे हमने भी कुछ पल, जिनमे वो हम पर ऐतबार कर रहे थे,
आज उन्ही लम्हों के संग सारी उम्र जीने को भी तैयार हैं।।
कमबख्त ये दिल भी पराया है, तन्हा चैन से जीने भी नहीं देता,
खबर हो जाये उन्हे हमारे दर्द का, ऐसी कोई ख्वाहिश होने नहीं देता।
मजबूर हो जाते हैं हम अपने दिल की जिद्दो जहत से,
और उन पर हमारे इस पागलपन का कोई असर नहीं होता।।
खबर हो जाये उन्हे हमारे दर्द का, ऐसी कोई ख्वाहिश होने नहीं देता।
मजबूर हो जाते हैं हम अपने दिल की जिद्दो जहत से,
और उन पर हमारे इस पागलपन का कोई असर नहीं होता।।
चुना तो हमने था उन्हें, उन्हे हम पर कब ऐतबार था,
गुनाह ये मुहब्बत का हमारा था, उन्हे कब इस से ऐतराज था।
वो कुछ लम्हों की ख्वाहिश में चुप से हो गये,
और हम इस ऐतराज को ऐतबार समझ उनकी बदनामी की वजह बन गये।।
गुनाह ये मुहब्बत का हमारा था, उन्हे कब इस से ऐतराज था।
वो कुछ लम्हों की ख्वाहिश में चुप से हो गये,
और हम इस ऐतराज को ऐतबार समझ उनकी बदनामी की वजह बन गये।।
थमा हुआ था हमारे ज्जबातों का सफर, हम तन्हाई में उनके अक्श से प्यार कर रहे थे,
जब वो मिले हमें हकीकत से, हम सच के संदेह में खामोश रह कर नये एहसास कर रहे थे।
लेकिन जज्बातों के इक दसक लम्बे सफर ने हमें अपने होने का एहसास कराया,
हम आज भी वहीं उसी अक्श की हकीकत के भंवर में खोये जा रहें हैं।।
जब वो मिले हमें हकीकत से, हम सच के संदेह में खामोश रह कर नये एहसास कर रहे थे।
लेकिन जज्बातों के इक दसक लम्बे सफर ने हमें अपने होने का एहसास कराया,
हम आज भी वहीं उसी अक्श की हकीकत के भंवर में खोये जा रहें हैं।।
ये सफर है जिन्दगी का.....
किसी और की चाहत में अपनी सासों से ही झगड़ रहा है।
बंद हो जायेगा ये झगड़ा भी इक दिन,
बस इन्तजार उन्हें उनकी मुहब्बत से मिलने वाले दिन का है।।
=================My hunt======================================
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========================= My endless Dream =======================
बडी प्यारी, बडी मासूम सी लगती है वो,
वो सोयी नहीं, कई सदियों से, हवा के संग बहती है वो।
मैं कोई शायर अगर होता, बन गजल संग बह लेता,
न जाने कितनी दूर, मेरे ख्वाबों में रहती है वो।।
वो सोयी नहीं, कई सदियों से, हवा के संग बहती है वो।
मैं कोई शायर अगर होता, बन गजल संग बह लेता,
न जाने कितनी दूर, मेरे ख्वाबों में रहती है वो।।
पलकों को कोई पूछे, न जाने किसकी परछाई है,
वो तो है बस, प्यार के काबिल, न जाने क्यूँ घबराई है।
मुक्तसर होगा इक दिन, सहर मेरे जीवन में लायेगी,
मुहब्बत है मेरी वो, मेरी सांसों में बस जायेगी।।
वो तो है बस, प्यार के काबिल, न जाने क्यूँ घबराई है।
मुक्तसर होगा इक दिन, सहर मेरे जीवन में लायेगी,
मुहब्बत है मेरी वो, मेरी सांसों में बस जायेगी।।
कभी गुमशुम, कभी प्यारी सी हवा का एहसास देती है,
मुहब्बत की कभी आहें, कभी दुआवों का संसार दती है।
कभी तो होगी चमक उसकी आँखों मॆ उसकी मुहब्बत की,
असर एक बार का नहीं, जन्मों के साथ का आगाज देती है।।
मुहब्बत की कभी आहें, कभी दुआवों का संसार दती है।
कभी तो होगी चमक उसकी आँखों मॆ उसकी मुहब्बत की,
असर एक बार का नहीं, जन्मों के साथ का आगाज देती है।।
न कहती है कभी कुछ, बस समझ लो, ऐसी बात करती है,
डरते हैं हम कितना उससे, वो फिर भी प्यार करती है।
कहाँ जाये चुरा कर हम उससे, उसकी नजरें साथ चलती हैं,
न जाने कब कहाँ कैसे, वो हमसे प्यार करती है।।
डरते हैं हम कितना उससे, वो फिर भी प्यार करती है।
कहाँ जाये चुरा कर हम उससे, उसकी नजरें साथ चलती हैं,
न जाने कब कहाँ कैसे, वो हमसे प्यार करती है।।
सहम न जाये वो हमारे पागलपन से, हम छिपा के रखते हैं,
बिखर न जाये वो हमारे सच से, हम चुरा के रखे हैं।
संग आयी अगर वो कभी हमारे, उसे भी अपने पागलपन से छुपा लेगें,
गर जो भींगीं कभी उसकी पलकें, उसके आँसू अपनी पलकों में सजा लेंगें।।
बिखर न जाये वो हमारे सच से, हम चुरा के रखे हैं।
संग आयी अगर वो कभी हमारे, उसे भी अपने पागलपन से छुपा लेगें,
गर जो भींगीं कभी उसकी पलकें, उसके आँसू अपनी पलकों में सजा लेंगें।।
न जाने किस घडी की आस में वो, सदियों से नहीं सोयी है,
हाँ वो है एक पगली, दीवानी, न जाने क्यों अपनी पलकों से रोयी है।
गर कहना है कुछ उसको, फिर क्यूँ सदियों में खोयी है,
कौन है उसका जो आयेगा अब यहाँ, ये है उसका मुकद्दर, वो क्यूँ नहीं इसे समझ पायी है।।
हाँ वो है एक पगली, दीवानी, न जाने क्यों अपनी पलकों से रोयी है।
गर कहना है कुछ उसको, फिर क्यूँ सदियों में खोयी है,
कौन है उसका जो आयेगा अब यहाँ, ये है उसका मुकद्दर, वो क्यूँ नहीं इसे समझ पायी है।।
हाँ आयेगी खुशियाँ हर तरफ से उसके दामन में, वो इसी उम्मीद में जी भर के रोयी है,
कोई मगर फिर भी क्यूँ है, उसे चाहता, जब कि जानता है, वो किसी और के सपनों में खोयी है।
न जाने किस घडी किस पल, मुहब्बत की हो दस्तक,
वो जो सोयी नहीं सदियों से, जन्मों तक न हो जगने की फूर्सत।
हाँ ऐसा ही जहाँ शायद वो जीना चाहती है,
पूरी हो उसकी हसरत, मिल जाये उसे मुहब्बत।।
---Ajay kumar (Azad)
कोई मगर फिर भी क्यूँ है, उसे चाहता, जब कि जानता है, वो किसी और के सपनों में खोयी है।
न जाने किस घडी किस पल, मुहब्बत की हो दस्तक,
वो जो सोयी नहीं सदियों से, जन्मों तक न हो जगने की फूर्सत।
हाँ ऐसा ही जहाँ शायद वो जीना चाहती है,
पूरी हो उसकी हसरत, मिल जाये उसे मुहब्बत।।
---Ajay kumar (Azad)
=======================During B.Tech Final Year====================
हर दिन एक ही आस में जीता हूँ,
मर ना जाऊँ इसलिए टुकडों में पीता हूँ।
कहीं तो छलक जाये, मेरे गमों का पैमाना,
बस इसी आस में अपनी सांसें गिनता हूँ।।
मर ना जाऊँ इसलिए टुकडों में पीता हूँ।
कहीं तो छलक जाये, मेरे गमों का पैमाना,
बस इसी आस में अपनी सांसें गिनता हूँ।।
अब मौत की जरूरत नहीं दोस्तों, इक और इन्तजार चाहिए।
उसकी वफा के वादों के लिए, एक अवतार चाहिए।।
उसकी वफा के वादों के लिए, एक अवतार चाहिए।।
जो सोचते हैं, वैसा होता नहीं है। जो होता है, उसे दिल मानता नहीं है।।
क्या अजीब कश्मकश है, शायद यही जिन्दगी है।।
क्या अजीब कश्मकश है, शायद यही जिन्दगी है।।
इक खुशी कितने रिश्तों को जन्म देती है, इक तन्हाई कितनी यादों को जनती है।
मैं कोई फरिश्ता नहीं मेरे दोस्तो, इस सीने में भी भावनाओं की कश्मकश होती है।।
मैं कोई फरिश्ता नहीं मेरे दोस्तो, इस सीने में भी भावनाओं की कश्मकश होती है।।
इतना भी हक न जताओ, सारे हक देने को जी करता है।
हमें हमारे होने का एहसास न कराओ, अपने एहसास से अब डर लगता है।।
हमें हमारे होने का एहसास न कराओ, अपने एहसास से अब डर लगता है।।
अधूरा था, अधूरा ही रह गया। कई और जो अपने थे, उनसे भी दामन छूट गया।।
चाहत तो थी किसी इक को अपनी आस बनाने की, एक जरिया था उससे भी दामन छूट गया।।
चाहत तो थी किसी इक को अपनी आस बनाने की, एक जरिया था उससे भी दामन छूट गया।।
गम तेरे न होने का करूँ, या तेरे न होने से जो नही है, उसका करूँ।
आदत तो पहले से ही थी, तेरे होकर भी न होने की,
सोचता हूँ सजदा रहूँ, तेरी यादों में, तू चाहे होकर भी रहे, या न होकर भी हो।।
आदत तो पहले से ही थी, तेरे होकर भी न होने की,
सोचता हूँ सजदा रहूँ, तेरी यादों में, तू चाहे होकर भी रहे, या न होकर भी हो।।
सोचता हूँ कुछ सवालों के जबाब क्या दूँ,
वो जो मुहब्बत है, उसे नाम क्या दूँ।
खुद तो बेवफा हूँ, अपनी पहचान से,
वो जो जीने की वजह है, उसे नयी पहचान क्या दूँ।।
वो जो मुहब्बत है, उसे नाम क्या दूँ।
खुद तो बेवफा हूँ, अपनी पहचान से,
वो जो जीने की वजह है, उसे नयी पहचान क्या दूँ।।
भीड़ में कौन अपना है, कौन बेगाना,
ये सोचने की फुर्सत कहाँ है।
बस चंद लम्हों में सजाना है, इक नया जमाना,
हम तो जोकर हैं, हमें सोचने की फुर्सत कहाँ है।।
ये सोचने की फुर्सत कहाँ है।
बस चंद लम्हों में सजाना है, इक नया जमाना,
हम तो जोकर हैं, हमें सोचने की फुर्सत कहाँ है।।
बिखरे पत्तों से अपना आशियाना बनाऊँ,
या बिखरे पन्नों को संजो कर नया जीवन रूप सजाऊँ।
पागलपन है ये बिखरी सासों का दीवानापन,
हाँ, किसी तस्वीर की ओट में, अपनी यादों का दर्पण सजाऊँ।।
या बिखरे पन्नों को संजो कर नया जीवन रूप सजाऊँ।
पागलपन है ये बिखरी सासों का दीवानापन,
हाँ, किसी तस्वीर की ओट में, अपनी यादों का दर्पण सजाऊँ।।
दीवानगी को अफसानों में बयां करती है ये दुनिया,
मोहब्बत किसी की, किसी और को बदनाम करती है दुनिया।
डर लगता है, आशिकी की हद से,
कभी सितारों को जमीं पे लाने की, तो कभी बेतहाशा नफरत की गवाह बनती है दुनिया।।
मोहब्बत किसी की, किसी और को बदनाम करती है दुनिया।
डर लगता है, आशिकी की हद से,
कभी सितारों को जमीं पे लाने की, तो कभी बेतहाशा नफरत की गवाह बनती है दुनिया।।
वो उम्मीदें नहीं थी, तो ज्यादा बेहतर था,
वो सरल लम्हां, इस दर्द के लम्हे से कहीं बेहतर था।
अब जब हर पल उम्मीदों की उम्मीदें बन- बिगड़ रही हैं,
अब लगता है, उम्मीदों के बिना जीना कितना मुश्किल है।।
वो सरल लम्हां, इस दर्द के लम्हे से कहीं बेहतर था।
अब जब हर पल उम्मीदों की उम्मीदें बन- बिगड़ रही हैं,
अब लगता है, उम्मीदों के बिना जीना कितना मुश्किल है।।
सपने, सोच क्या हैं..., एक जागती दुनिया की गवाह हैं,
जी लो उन रिश्तों, सपनों को, जिनको जीने की तुम में चाह है।
जील होगा अगर, तुम में अपनी सोच को आकार देने का,
ये सपने कोई वहम नही, तुम्हारे समय चक्र का पूर्व प्रवाह है।।
जी लो उन रिश्तों, सपनों को, जिनको जीने की तुम में चाह है।
जील होगा अगर, तुम में अपनी सोच को आकार देने का,
ये सपने कोई वहम नही, तुम्हारे समय चक्र का पूर्व प्रवाह है।।
कुछ इबादतें क्यों नहीं दुबारा लिखी जातीं,
कुछ एहसास क्यों नहीं दुबारा महसूस किये जाते।
ये रिश्तों के बन्धन, ये एहसासों की बातें,
क्या हैं, ये कमबख्त, कुछ महसूस नही होते, कुछ निभाये नहीं जाते।।
कुछ एहसास क्यों नहीं दुबारा महसूस किये जाते।
ये रिश्तों के बन्धन, ये एहसासों की बातें,
क्या हैं, ये कमबख्त, कुछ महसूस नही होते, कुछ निभाये नहीं जाते।।
डर लगता है, जो आस है उन्हें संजो नहीं पाऊँगा,
अपने जीने की वजह को, अब और नहीं जिला पाऊँगा।
ये जो मोहब्बत की दुनिया है मेरे दोस्तों, मुबारक हो उन्हें,
ये कफन है मेरा, अब अपनी धड़कनों को और नहीं बहला पाऊँगा ।।
अपने जीने की वजह को, अब और नहीं जिला पाऊँगा।
ये जो मोहब्बत की दुनिया है मेरे दोस्तों, मुबारक हो उन्हें,
ये कफन है मेरा, अब अपनी धड़कनों को और नहीं बहला पाऊँगा ।।
चाहत थी, जला के खुद को रौशन कर देगें मुहब्बत की शमा,
हम बनें न बनें, बना लेगें उन्हें अपनी धड़कनों की वजह ।
ख्नाब था हमारा हम तक ही सिमट के रह गया,
वो जो हमसफर था मेरा, अपनी तलाश में मुझसे कहीं दूर हो गया ।।
हम बनें न बनें, बना लेगें उन्हें अपनी धड़कनों की वजह ।
ख्नाब था हमारा हम तक ही सिमट के रह गया,
वो जो हमसफर था मेरा, अपनी तलाश में मुझसे कहीं दूर हो गया ।।
कुछ रिश्ते इतने दर्द देते हैं कि दर्द का एहसास मिट जाता है,
न उनको पाने की चाह बचती है, न खोने का गम सताता है।
फिर ये जो दिलों की दुनिया, रिश्तों के नये द्वार खोलती है,
फिर भी उन्ही के यादों के साये में, हम आज भी अपना वजूद तलाशते हैं ।।
न उनको पाने की चाह बचती है, न खोने का गम सताता है।
फिर ये जो दिलों की दुनिया, रिश्तों के नये द्वार खोलती है,
फिर भी उन्ही के यादों के साये में, हम आज भी अपना वजूद तलाशते हैं ।।
तुझसे जुड़ी यादों के सिवा मेरे पास मेरा बचा ही क्या है,
आज भी जिन्दा हूँ, न जाने मेरी धड़कनों की रजा क्या है ।
तन्हाई की धूप में, तन्हा ही जला हूँ मैं,
ये सिसकन रातों की, न जाने इस दर्द की वजह क्या है ।।
आज भी जिन्दा हूँ, न जाने मेरी धड़कनों की रजा क्या है ।
तन्हाई की धूप में, तन्हा ही जला हूँ मैं,
ये सिसकन रातों की, न जाने इस दर्द की वजह क्या है ।।
kya baat hai bhai, chhupe rustam ho.
ReplyDeleteVery nice creations .All the very best to you !!
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